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लड़कों के हाफ पैंट पहनने पर लगी रोक, मोबाईल भी नही रखेंगे अपने पास

बागपत की खाप पंचायत के सख्त सामाजिक फैसले

बागपत, 27 दिसंबर 2025 (आरएनएस)।  पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में आयोजित देशखाप की विशाल पंचायत में समाज सुधार के नाम पर कई कड़े और चौंकाने वाले फैसले लिए गए हैं। पंचायत में युवाओं के पहनावे, तकनीक के उपयोग और शादी-विवाह की परंपराओं को लेकर नए सामाजिक नियम तय किए गए, जिन पर क्षेत्र में व्यापक बहस छिड़ गई है। खाप पंचायत का कहना है कि आधुनिकता की दौड़ में सामाजिक मर्यादाएं कमजोर हो रही हैं, जिन्हें बचाने के लिए अनुशासनात्मक कदम जरूरी हो गए हैं। इन निर्णयों में केवल युवतियों ही नहीं, बल्कि युवकों पर भी कई पाबंदियां लगाई गई हैं। पंचायत में सबसे ज्यादा चर्चा लड़कों के पहनावे को लेकर रही। खाप चौधरी ब्रजपाल सिंह धामा ने फरमान जारी करते हुए कहा कि अब लड़के सार्वजनिक स्थानों या घरों में हाफ पैंट (बरमूडा) पहनकर नहीं घूमेंगे। उनका तर्क था कि ऐसा पहनावा परिवार की बहू-बेटियों के सामने अशोभनीय है और समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके साथ ही पंचायत ने 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों को स्मार्टफोन न देने का फैसला भी सुनाया। खाप का कहना है कि मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल युवाओं को संस्कारों से दूर कर रहा है और उन्हें गलत दिशा में ले जा रहा है। शादी-विवाह की परंपराओं को लेकर भी पंचायत ने सख्त रुख अपनाया। खाप ने मैरिज होम में विवाह कराने का विरोध करते हुए कहा कि शादियां गांव और घरों के पारंपरिक माहौल में होनी चाहिए। पंचायत का दावा है कि मैरिज होम में होने वाले विवाह अक्सर लंबे समय तक टिक नहीं पाते। फिजूलखर्ची रोकने के उद्देश्य से एक नया फैसला लेते हुए पंचायत ने कहा कि अब व्हाट्सऐप पर भेजा गया डिजिटल निमंत्रण पत्र ही आधिकारिक बुलावा माना जाएगा, ताकि छपाई और वितरण पर होने वाला खर्च बचाया जा सके।

खाप चौधरी ब्रजपाल सिंह धामा ने ऐलान किया कि ये नियम केवल बागपत तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में अन्य खापों के सहयोग से इन्हें लागू कराने के लिए अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने राजस्थान में हाल ही में लिए गए ऐसे ही सामाजिक फैसलों का समर्थन करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं की ओर लौटना होगा। हालांकि, इन फैसलों को लेकर समाज में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां कुछ लोग इसे सामाजिक अनुशासन के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं कई लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप मान रहे हैं।

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